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Wlcm back my love
मैंने शायद ही कभी छुआ हो उसको,
मगर चूमने का एहसास है...
मैंने फेरा है अपना हाथ उसके सिर पे,
जैसे छोटे पे ही दिया आशीर्वाद है....
बीमार हो या चोट लगी हो कभी जो,
पापा बन के डांट लगाई है....
नाटक करती थी अच्छा खाना खाने में,
हां, शायद ये बेकार आदत भी मैंने लगाई थी...
भाई-भाई करके सारी बात मनवाई थी,
प्यारा सा मुंह लेकर वो खुशियों का भंडार लाई थी,
मैंने ली रखी हैं कुछ तस्वीरें पास में,
जन्मदिन का लिखा खत भी पास है....
ऐसा लगता है जैसे अभी भी वो मेरे पास है,
उसका चेहरा कोमल सा गाल मेरे हाथों में कैद है....
आसुओं से खत पे कुछ निसान आ गए है,
यादें और किए वादे भी ताज़ा हो गए है....
काफ़ी कम वक्त मिला हो जैसे प्यार करने को,
जल्दी बड़े हो गए है दूर होने को...
हर रूप में अपना माना है,
चाहे बहन ही बोल पाया मगर देवी भी माना है,
ऐसे तो कई प्यारे नाम दिए थे,
जिनपर शायद मेरा ही अधिकार था...
अब तो मानो नया जीवन शुरू हो गया...
उम्मीद है कोई मुझसे अच्छा साथ दे,
प्यार में शर्त लगा सकता हूं बहन,
कोई नही बराबरी कर सकता है मेरी....
कई यादें है जुड़ी जिसमे मैं तुम्हारे साथ हूं,
पता नही था राह का मगर निकल पड़ा था कहीं को,
सिर्फ मेरा ही प्यार करना याद नही,
तुम्हारा भी दिल के करीब है....
मुझे मनाना उनमें से एक है,...
मुझे याद है कैसे छोटी से बड़ी हो जाती थी,
कुछ अपशब्द भी बोलने पढ़ते थे तो बोल जाती थी,
मगर ठीक कर के ही हमेशा सांस लेती थी,
रात रात भर बातें करते थे,
पहले बीमार थी तो बेचारी कह कर साथ देते थे,
फिर रात भर डरावनी बातें करते सोते थे,...
मैं खाना अक्सर भूल जाता था....
शायद वक्त चुरा के तुमने से मिलता था,...
तुम्हें खिलाने को झूठ बोला हमेशा,
हां, मगर ये पहला झूठ नही रहा....
हमेशा मैं ही पिता बन कर मदद करना चाहा,
खुद टूटा तो बिना बुलाए तुम्हे पाया...
मैं वापस बुलाना चाहता तो हूं,
मगर आवाज़ नही देना चाहता अब,
हमारे बीच हुई लड़ाई का सबब मिल गया है शायद,
लगता है जैसे तुम कही और ही खुश हो,
मुझे लगता था मैं चीजों को भुला देने में माहिर हूं,
असल में मैं कायर हूं....मैं मरने से भी डरता हूं,...
मैं जीने के लिए वजह से ज्यादा नशा ढूंढता हूं,
मैं भूलने शब्द खोजता हूं कभी तो...
मैं रो कर या सो कर खुद को नया चाहता हूं,...
मैं इतना डरपोक हूं की मैं सरल काम चुनता हूं,
ना मरना पड़े तो तेरा वादा और मां का चेहरा याद करता हूं,
मैं बहुत मतलबी भी हो गया हूं,
तुम्हे वापस पाने को ही नया झूठ बुनता हूं,
मगर सच तो ये है की मैं आज भी उतना ही प्यार करता हूं,
एक बार भावनाएं बताने में विफल था,
और उसके असर से निकला रास्ता नहीं भुला हूं...
मैं एक और कोशिश से और कुछ नहीं खोना चाहता,
मगर अब ऐसे जीना भी नहीं चहता...
मुझे याद आती थी तो अगले पल आती थी तुम,
लगता था जैसे हम एक ही हो दो बदन...
मैं डर में देखो क्या बता के पाया,
सच छुपा के शायद कुछ अच्छा हो जाता...
तुम्हारे बाल जो गालों पे आते थे,
तुम्हारे होठ जो मेरे मन को भाते थे...
तुम जब मेरे करीब होती थी....
मन बस गोदी में सिर रख के बातें करने का होता था,
तुम्हे खाना पसंद था और मैं खिलाना चाहता था,
कुछ ज्यादा शौक नहीं थे मगर भी तुम्हारा हो कर...
हमेशा के लिए तुम्हारे हाथ का बनाया कुछ चाहता था,
नींद लाने को खुली आखों से तुम्हे देखना पड़ता है,
जैसे बोल रही हो कुछ नींद में की कल मस्ती करते है...
मैं पागल नही हूं बस यादों में घुम हूं,
पास थे इतने की अकेले रहने से तंग हूं...
इच्छाएं तो बहुत बना ली तुम्हारे संग जीने मरने की...
मगर कभी ये नहीं सोचा की पहले साथ छूटा तो क्या होगा,
हर एक बारीकी याद है चेहरे की,
शायद वही गौर से देखा था....
माफ करना और कुछ तारीफ में नही कह पाया...
जो सच था वो ये की सादगी का या खुशी का,
मैंने तुम्हें पा कर जाना असली अर्थ था,...
मैं इस रोते गाते जिंदगी में बहुत कुछ लिख सकता हूं,
ये कोई कविता नहीं बस एक खत है...
जो शायद कोई कबूतर नही तुम तक पहुंचा सकता,
मैं कांपते हाथों से लिखा हूं,
गले लगाने को तड़प रहा...
चूमने से शायद कभी मन न भरे,
एक उम्र जो मैं कभी नही भूल सकता,
एक नाम जिससे प्यार भी है और मेरे साथ अब न होने से...
नफरत भी बहुत ही रही है....
मुस्कान वो भी एक सुंदर चेहरे पे,
शायद वो सुंदरता कोई और नहीं देख सकता,
शायद वो कही और नही मिल सकती,
इस लिए मैं अपनी इस ओज की खोज समाप्त करता हूं,
मुझे उतना ही या अब उससे भी अधिक प्रेम हो गया है,
ये लिखना और यादें कभी भी खत्म हो सकती तो,
मैं तुम्हारा भाई, पिता,...... आई लव यू मोटी।
By~ Pradeep Yadav
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