नव भारत को हम से मिलाया जाए~
अब खत्म हो गई इंसानियत तो नया धर्म बनाया जाए,
ढल चुकी है शाम की सुबह का आईना दिखाया जाए।
जिसमे दो दिल होकर भी एक दिल को अपनाया जाए,
कोई इस तरह का फूल भी हर तरफ खिलाया जाए।
कुछ लोग अंदर ही अंदर से खत्म कर रहे है देश को,
दुख-दर्द की इस घड़ी में शहर को जलने से बचाया जाए।
चलो आज हर एक तिनके को इज्जत दिलाया जाए,
खुद को गम करके नव भारत को हम से मिलाया जाए।
ऐसी जिंदगी कहा देखने को मिलती है चलो बताया जाए,
दिल के दरिया में उतर कर सूरज से पर्दा हटाया जाए।
इस घर में कभी कोई पुराना लौट के आए तो दिखाना,
घर क्या होता है और कैसे इसको दिल से सजाया जाए।
सिर्फ मुद्दा उठाना या जीत लेना ही नहीं सिखाया जाए,
अगर मदद करनी है तो सही राह बता कर मनाया जाए।
By~ Pradeep Yadav
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