क्या समझोगे?~
तुम समझो इस इरादे से मैंने अपना प्रेम लिखा भी नहीं था,
मोहब्बत छोड़ देती है रुसवा ही की तुम क्या जानो या समझोगे,
बेशक बेमिसाल होता है खुद में जीना और धरती की गोद में मरना,
मगर तुम क्या जानते हो गरीबी में कैसे लगता है आसमां से ज़मी को देखना।
By— Pradeep Yadav
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