मैं हिजड़ा हूं~
हां, मैं भी इस धरती का लाल हूं, निर्धारित आयु में सबके लिए आशीर्वाद हूं,
पहले बिछड़ा था अब अभिशाप हूं, अमीरी और खुशियों से सबके घर में मेहमान हूं।।
एक सस्ता-सा सोता फेरे ख़ुशबुओं का, बदन में कपड़े डाल के छाति उभारे हूं,
औरत के शरीर में पुंसत्व के साथ हूं, फिर भी इंसान के श्रेणी से बाहर हूं।।
जो तुम पढ़ के पहुंच गए हो चांद पे, मैं अब भी एक अनपढ़ता पे सवाल हूं,
तिरस्कृत ही इंसान पे अपमान हूं, मैं किन्नर-हिजड़े नाम से विश्व में बदनाम हूं।।
सबको अपने हिस्से का बिस्तर मिल गया, औरत ने ही तो औरत को जन्म दिया,
और अब उसी खोख से निकला पाप हूं, मैं आज भी चार दिवारी को बेहाल हूं।।
आज़ादी के कई साल हुए मुझे भी मौका दो, जैसे वासना की विराट गंगा ने मुझे फेंका है,
रेत के बाँबियों की खोख से जन्मा नाग हूं, मैं गाली नहीं सम्मान दो कि गर्व से हिजड़ा हूं।।
By~ Pradeep Yadav
अभिशाप;
पुल्लिंग
बड़ा शाप, लांछन।
सोता;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
जल स्रोत; स्रोत
नदी या झरने का उद्गम स्थल
झरना; चश्मा
पुंसत्व;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
पुरुषत्व; पुरुष होने का भाव
पुरुष की कामशक्ति
शुक्र; वीर्य।
बाँबियों;
बाँबि: sanskrit
holes for snakes etc.
वासना;
संस्कृत ; संज्ञा स्त्रीलिंग
भावना; कामना; इच्छा, कल्पना; विचार; ख़याल, दबी हुई इच्छा, विषय लालसा।
तिरस्कृत;
संस्कृत ; विशेषण
जिसका तिरस्कार किया गया हो; जिसकी अवहेलना की गई हो; अपमानित।
Comments
Post a Comment