प्यार में रहे~

वादे किए चलते रहे,
जीते-जीते मरते रहे,
ज़िद थी की शुरुवात करूं,
बहुत सोचा की करके देखूं और जान बनू,
मगर अब प्यार में गिर के कितने सलाम करूं।

कहां चांद और चेहरा है,
किसने कह दिया वो मेरा है, 
चांद-सितारों को लाने से डर गया मैं,
उसकी ना जाने किस बात पे मर गया मैं,
दिल मेरा था जो खुद ही तोड़ा मैं।

जहाँ था मेरे सामने सहते हुए,
घर और दीवारें लगते सिसकते हुए,
घर की दीवार आसूं रोते रहे,
प्यार में वादे इतने कर लिए मैंने,
कि पाया गया अकेले में रोते हुए।

कुछ भी जरूरी नहीं समझा मैं,
बचे रह गए निसान जो नहीं मेरे थे,
आखें दर्द बयां करती है ये शब्द जरा गहरे है,
चुप-चुप हैं फिर भी लगते हैं उलझे हुए,
किससे कहे सबने रोका था मुझे।

समय निकलते सब भूलते रहे,
प्यार में रहे लेकिन मचलते रहे,
फिर भी ख़फ़ा दोनों बिछड़ने पे थे, 
चाहा की आ जाए वापस वो,
मगर अपनी चाहत को हम बदलते रहे।

                             By~ Pradeep Yadav




Comments

Popular Posts