सस्ते बोल मेरे~
ये सुबह, ये शाम, ये रात दीवानी,
मासूमी याद रखेगी मेरी नादानी।
जो फूली ना समाती मेरे तन से,तो आज कैसे बसती वो मेरे मन में।
पेड़ों के झुरमुट से नील-गगन में,
कैसे छुपा के रखा है चाँद ज़मी पे।
तड़ित मेरे मेहनत से घन हुआ है,
रातरानी का मेरे बस्ती में बन हुआ है।
इस बार गीत से आगमन हुआ है,
कुछ शब्दों से आवारा पन हुआ है।
दर्पण सी उसकी झील सी आखें है,
धनक नयन से रुख भजन का हुआ है।
सस्ते बोल मेरे अचल आधार के घर में,
रास्ते कई निकले चंद्र-किरन के डर से,
प्रस्तर है अब मेरा पता जीवन भर का,
मैं निकला हूं शब्द ले कर काम भर का।
By~ Pradeep Yadav
मासूम;
विशेषण
निश्छल; भोला
निरपराध; बेगुनाह
निर्दोष; निरीह; दया का पात्र।
झुरमुट;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
पास-पास उगे हुए कई पेड़ या झाड़ियाँ जिनकी डालियाँ आपस में मिली हुई हों
बहुत लोगों का समूह; गिरोह
चादर या किसी कपड़े से शरीर को पूरी तरह ढक लेने की क्रिया
बच्चों का एक खेल जिसमें वे घेरा बनाकर नाचते हैं
नील-गगन;
Sanskrit ; Noun, Masculine
blue, blue sky, azure sky, cloudless clear sky
तड़ित;
संस्कृत ; संज्ञा स्त्रीलिंग
बादलों में चमकने वाली बिजली; आकाशीय विद्युत; सौदामिनी; चंचला।
घन;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
लोहा पीटने का हथौड़ा
बन;
forest/ jungle/ become
रातरानी;
संस्कृत ; संज्ञा स्त्रीलिंग
एक पौधा जिसका फूल रात में खिलता है।
धनक;
rainbow
दर्पण;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
कलई किया हुआ एक शीशा जिसमें प्रतिबिंब दिखाई देता है; आईना; आरसी।
अचल;
संस्कृत ; विशेषण
स्थिर; गतिहीन।
चिरस्थायी; शाश्वत।
अपरिवर्तनशील; अटल; अडिग।
आधार;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
वह मूल फलक, जिस पर कोई वस्तु या विचार आधारित हो।
अवलंब; सहारा।
नींव।
चंद्र-किरन;
ray of moon
प्रस्तर;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
पत्थर
समतल स्थान
पत्तों का बिछौना या बिस्तर।
Comments
Post a Comment