भ्रम में हूं~
इक गठरी लिए सितारों के आसमां में हूं,
होश-ओ-हवास से कइयों के मान में हूं।
निकल पड़ा हूं जबसे ओज ऐसी खोजने,
कि सितारों से ज्यादा इसी काम में हूं।
मुझे खुशी है की मैं अब अविराम में हूं,
पहले से कितनो के संग प्रेम नाम में हूं।
मैं जब तक खुद के मन से ध्यान में हूं,
तब तक दर्द से ज्यादा आराम में हूं।
मेरे नयन मिले उससे मगर दिल ना मिले,
ऐसे भौचक्केके अध्ययन से उत्क्रम में हूं।
हो सकता है मेरे रोने से दिया जलता रहे,
इसलिए तो मैं हैरान ही नहीं गम में हूं।
"प्रदीप" देखता है की विश्व कलम में हूं,
रोज जागता हूं क्योंकि अब तक भ्रम में हूं।
By~ Pradeep Yadav
ओज;
light
प्रकाश, रोशनी, दीपक, चमक, आलोक
उत्क्रम;
संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग]
उलटा क्रम, क्रमभंग, विपर्यय, क्रमिक उन्नति, ऊपर जाना।
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