पिता भी एक ऐसा वक्त आने पे रोता है,
जब उसका ख़वाब देखने वाली बेटी विदा होती है,
नाराज़गी दोनो कैसे जाहिर करते एक दूसरे से,
उस वक्त आसूं आखों में आने से बुरा मानती है।

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