क्या होता है~
घर वालों के लिए तो सभी अच्छे होते है उम्र भर के लिए,
खुद को अच्छा इंसान बनाने निकला हूं देखो क्या होता है।
मैं वो मिट्टी नहीं जिसके होने से घर का संतुलन होता है,
गांव के घर में मेरे होने से या ना होने से देखो क्या होता है।
दोस्ती-यारी की कहानियां मैं भी सुनाऊं ये जरूरी तो नहीं,
किसी को तो पता चले यादें छिपाए रखना क्या होता है।
दृष्टिहीन हो कर आहे भरना क्या होता है जब आखें न हो,
तो फिर चलने के लिए राहें खोज कर देखो क्या होता है।
औरों को जीवन भर खुद को अच्छा बताना क्या होता है,
जब चौखट पे दुख पसरा हो तो बहाना देखो क्या होता है।
जब सब छुपा के रखते है वक्त को अपने बाजुओं में तो देखो,
वो गलत कहते है प्यार में जात का तुम देखो क्या होता है।
अब जो निकला हूं इंसानियत खोजने तो देखो क्या होता है,
मैं सुधर गया और दुनियां बदल गई तो मेरा देखो क्या होता है।
By~ Pradeep Yadav
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