चुनाव और महामारी~
हमनें उनका गर्व से फ़ौरी पुतला बना दिया,
हम मिट्टी के इंसान थे मिट्टी में ही मिला दिया।
हिंदू समाज बोलकर मुस्लिमों से लड़ा दिया,
रामराज विधायक ने मटन-शराब बटा दिया।
तस्कर के पैसा से चौपाल में भीड़ उमाड़ दिया,
चुनाव आते-आते पैसों से सबको दबा दिया।
जिसने देखने-सुनने और बोलने में तनाव दिया,
रामनामी पहने बापू का भक्त बताकर ताव दिया।
रोजगार हो या धर्मनिरपेक्षता का संविधान दिया,
इस महामारी में खुद की बाज़ी अबाध मार दिया।
बच्चा लड़ते-लड़ते खुदको बचपन से निकाल दिया,
रख-रखाव करते चनाव करा के पढ़ाई टाल दिया।
बिखरे देश को राजनीति ने कितना साल दिया,
अतृप्त इच्छाओं ने अंधेरे के ओर ढाल दिया।
By~ Pradeep Yadav
विशेषण
तत्काल ध्यान देने योग्य
तुरंत करने योग्य
महत्वपूर्ण; अत्यावश्यक; (अर्जेंट)।
तस्कर;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
(स्मगलर), चोर।
चौपाल;
संज्ञा पुल्लिंग
गाँवों में वह स्थान जहाँ पर लोग एकत्रित होकर बातचीत व मनोरंजन करते हैं, छतदार चबूतरा, चारों ओर से खुली छायादार पालकी।
रामनामी;
संज्ञा स्त्रीलिंग
गले में पहनने का एक प्रकार का आभूषण
एक दुपट्टा जिसपर राम नाम लिखा हो।
धर्मनिरपेक्षता;
संस्कृत ; संज्ञा स्त्रीलिंग
धर्मनिरपेक्ष होने की अवस्था या भाव; (सेक्युलरिज़म)
ऐहिकता, असांप्रदायिकता।
अबाध;
संस्कृत ; विशेषण
निर्बाध; निरंतर; लगातार।
बाधाहीन; जिसमें कोई बाधा या विघ्न न हो; निर्विघ्न।
अपार; असीम।
अतृप्त;
संस्कृत ; विशेषण
जिसकी भूख या इच्छाएँ पूरी न हुई हों।
जो तृप्त अर्थात् संतुष्ट न हो; जिसका मन न भरा हो।
जिसकी प्यास न बुझ पाई हो; प्यासा।
अप्रसन्न; नाख़ुश, अपूर्णकाम।
खिंचाव;
Tension
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