यहां और वहां~

दोस्तों के खत ने आशुओं के गम छांट दिए,
इस तरफ़ कुछ यारों ने प्यार में दोस्त ही बांट दिए।

रौशनी हर तरफ़ से आने की उम्मीद ज्यादा थी,
कुछ कुटिल मुस्कान लिए रास्ते ही काट दिए।

लोग गरल बोते रहे नफरतों के बिज़ लगाकर,
हम सुरबाला समझकर सबको देवी मानते रहे।

वो भी कर रहे होंगे विश्वास कि बहिश्त मिलेगा,
अदृष्ट चाल चले की दिल से चाहत निकाल दिए।

नोटों पे टकसाल ने सिक्कों को जो ढाल दिए,
फिर सारे खोटे निकले और उछाल दिए गए।

यहां और वहां की दोस्ती में अंतर जान लिए,
कि जो दोस्त अब आए उनकी दोस्ती टाल दिए।


                                           By~ Pradeep Yadav


कुटिल;
संस्कृत ; विशेषण
टेढ़ा, मन में कपट व द्वेष रखने वाला; चंट; कपटी, दुष्ट।
{ला-अ.} दिल का काला; चालाक।

बहिश्त;
संज्ञा पुल्लिंग
स्वर्ग; बैकुंठ; ज़न्नतpp
{ला-अ.} स्वर्ग जैसा सुखमय स्थान।

गरल;
विष, ज़हर

सुरबाला;
संस्कृत ; संज्ञा स्त्रीलिंग
देवता की स्त्री; देवकन्या
अप्सरा; देवांगना
देवी।

टकसाल;
Sanskrit ; Noun, Feminine
mint, touchstone, criterion, assay office
वह स्थान जहाँ सिक्के ढलते हों; सिक्के तैयार करने की आधुनिक यंत्र-शाला।

अदृष्ट;
न देखे हुए

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