सच ही तो है ये की मैं क्या जानूं दूरियों का अहसास क्या होता है,
बस तड़प कर गुज़रती है हर रात तब जा कर दुख का एहसास होता है,
जाने अंजाने चेहरे देखते ही सबको ख़बर छपे ऐसा प्यार चाहिए,
किस क़िस्म की मोहब्बत लिए फिरते हो जो चार दिन बाद कोई नया यार चाहिए।
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