आखों के नीचे जमती जा रही है रेत,
धूल उड़ेगी तो निशान दिखेंगे जरूर,
सुलगते है कई सवाल मेरे दिल में,
दिल अब बिखरा है तो आवाज़ होगी बहुत।

सूखे हुए फूलों को बहुत देखे है हम,
बिखरती हुई जिंदगानी देख रहे है अब,
मुझमें ही कमी थी कहानी लिखने में,
स्याही खत्म हो रही थी इश्क़ कहने में।



सुलगते;
ignite, kindle, smoulder

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