लिखता रहूंगा चाहे जो हो जाए~
मेरे उपलब्द प्रश्नावली जिंदगी के पन्नों से निकले तो मुहाना हो जाए,
मेरे शब्द पदावली बन कंठ से निकले तो सबका दिन सुहाना हो जाए।
मेरे लेख में तो सब जी लेते है मगर एक दिन तो असल ठिकाना हो जाए,
मेरे दिल में तो सब रह लेते है कि अब प्यार करने को फ़साना हो जाए।
मेरे चेहरा के नज़दीक ही किसी मीठी सी नज़रों का टकराना हो जाए,
बहुत ख़ामोश रहता हूं कि जब बोलूं तो मुझको गले से लगाना हो जाए।
मेरे दिन कम हो जाए तो एक दिन कम ही सही सांवले सारे सवेरे हो जाए,
खूबसूरत है ये रंग कि जब आसमां की ओर देखे तो सब शाहाना हो जाए।
मेरे आसूं बीती बातों की तरह शराब जैसे पुराने मगर मयख़ाने हो जाए,
चांद तारों पे घर नहीं है मेरा अगर कोई कहे तो वहां भी आशियाना हो जाए।
मेरे जाने से हर तरह रौशनी हो जाए अगर कोई चाहे तो मेरा पता हो जाए,
मैं लिखता रहूंगा शाम तक चाहे तो रात को वो मिलना सदाना हो जाए।
By~ Pradeep Yadav
मुहाना;
किसी रास्ते आदि का वह छोर जिससे होकर लोग किसी ओर जाते या मुड़ते हैं, वह जगह जहाँ नदी की धारा समुद्र में मिलती है, डैल्टा।
प्रश्नावली;
questionary
प्रश्नमाला, प्रश्नावली, प्रश्न समूह
संस्कृत ; संज्ञा स्त्रीलिंग
पदों का क्रम, शृंखला या समूह
गाए जाने वाले पदों, भजनों और गीतों का संग्रह, जैसे- विद्यापति पदावली, पदों या शब्दों की परंपरा, किसी सहित्यकार द्वारा प्रयुक्त शब्दों की योजना
शाहाना;
[वि.] - शाही; राजसी , बेहद उमदा; बहुत बढ़िया।
फ़साना;
a tale, a romance, a fiction
सदाना;
Forever
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