कौन हो तुम???

इस चेहरे को पहचान सकूं कोई तो ऐसी बात करो,
या तो अपनाने में लग जाऊं या तो ढंग की बात करो।

जाने कौन हो तुम अजनबी जिससे मैं कुछ आस करूं,
जिसके संग ख्यालों में रहती हो जाकर उससे बात करो।

चाहत हो या दिक्कत हो बतला दो मुझेको कौन हो तुम,
चाहे तो मुझपर विश्वास करो या हलाहल साफ करो।

तुम दिल में बसा के रखोगी फिर निकाल दोगी एक दिन,
इससे अच्छा होगा की पहुंच हो वही तक की बात करो।

उपालंभ करना हर जगह जो कहने पे नकली बातें की,
होटों की जो महक है उसके तारीफ़ में भी बात करो।

मैं दूर रहूं या पास रहूं मिलना ताकि तुमको सलाम करूं,
खुद रूठ जाना और उम्मीद की पहले तुम बात करो।

दिल में किसी के साथ रहूं या दिल के सुधा की सांस रहूं,
कौन हो तुम और क्यों कहती हो की आ कर बात करो।

                                               By~ Pradeep Yadav



हलाहल;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
(पुराण) समुद्र-मंथन से प्राप्त एक भयंकर विष
एक विषैला पौधा
एक अत्यंत विषैला साँप; ब्रह्मसर्प
 ज़हर; विष।

सुधा;
संस्कृत ; संज्ञा स्त्रीलिंग
अमृत; पीयूष
मधु; शहद
जल; पानी।

उपालंभ;
संस्कृत ; संज्ञा पुल्लिंग
किसी से उसके द्वारा किए गए किसी कार्य या व्यवहार की शिकायत; उलाहना।

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