उसका ही साथ था इन कांटे भरे राहों में,
वो किसी और से प्यार कर बैठी थी, भर के मुझे बाहों में।

न मिल सकी हमें वो सच्चाई भरी बातों में,
कोमल चेहरे से मोहब्बत हुई थी, नसीब न रहा पनाहों में।

मैं हाथ पकड़ चलता था राह के किनारों में,
फिर भी उसे कितनी दफा मांगना पड़ा, हर एक दरगाहों में।

हमारा नाम पुकारा गया गुनहागरो में,
मैं हुआ करता था हमेशा उसकी, जुल्फों के 

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