न जाने ये कैसा समय बर्बाद है—

वो कहती है की देखना मेरे देखते वक्त की कोई देख ना रहा हो तुम्हें मेरे देखने पर,
मैं कहता हूं देख लो देखते वक्त जी भर के फिर क्या पता देख भी पाओगी देखने की चाहत पर।
वो फिर रूठ गई इस बात पर की देखने से क्या ऐतराज़ है आखिर क्यों देखने पे सवाल है,
मैंने बता दिया की देखने को तो देख सभी रहे अगर छुप के देखना हो कह दो प्यार है।



                                          By— Pradeep Yadav

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