कोई थामें मुझे—

तेरे ख़्याल में पल हर पल आया हूं,
तुझे अपने नफ़्स में बसा लाया हूं।

था कैद में की मैं मजनूँ बन आया हूं,
ख़्वाब भी हकीकत से चुरा लाया हूं।

आखिरी बार उससे सिमट के आया हूं,
उम्र भर के घाव खुदमे भर के लाया हूं।

मैं रिश्तों में हार पे क़बा फैला आया हूं,
मैं हयात को अपने उससे बचा लाया हूं।

मैं शब्दों के समंदर में निकल आया हूं,
कोई थामें मुझे अपना बचपना लाया हूं।

ज़िंदगी के बहुत से सवाल ले आया हूं,
खुद को हार की आर से पार लाया हूं।

फूल से धूल के सारे क़र्ज़ उतार आया हूं,
मैं इस चेहरे पे कई राज़ सज़ा लाया हूं।


                                By— Pradeep Yadav



nafs;
नफ़्सنفس
soul, spirit, self
आत्मा, आत्मा, स्वयं

hayaat;
हयातحیات
life, existence
जीवन, अस्तित्व

qabaa;
क़बाقبا
apparel, garment
परिधान

aar;
आरعار
shame, bashfulness, hatred
शर्म, लज्जा, संकोच घृणा, घिन, लाज
लज्जा, लाज, गैरत, घृणा, नफ़रत, घिन, दोष, ऐब ।

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