दाद—
कुछ भी बुरा या अच्छा नहीं होता इस ज़माने के लिए,
भूल जाते है राह कट जाती है जिंदगी में राहें बनाने के लिए।
कुछ ज़मीं के लिए होते है हम कुछ आसमां के लिए,
भूल क्यूं जाते है दौड़ के उड़ना गिर जाते है दूसरो के लिए।
कुछ मंजिले मुश्किल होती है लड़ के अकेले बढ़ने के लिए,
भूल जाते है गम से पीछा छूटते ही दाद दिलाने के लिए।
कुछ गलती खुद की भी मान लेना उसकी छुपाने के लिए,
भूल क्यूं नहीं जाते कल रात की बातें खुद को उठाने के लिए।
कुछ दोस्ती तबाही से भी कर लेना अच्छों को बचाने के लिए,
भूल जाते है दोस्त अक्सर दोस्त ही होता है संभालने के लिए।
कुछ तुम भी कोशिश कर लेना खुद को मुस्कुराने के लिए,
भूल क्यूं ही नहीं जाना चाहें आखें होती है गम बहाने के लिए।
By— Pradeep Yadav
daad;
दादداد
appeal, justice, praise, ovation
इन्साफ़, फरियाद सुनना, प्रशंसा करना
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