भेड़-चाल है~
ख़्वाब में राज कुमारी है जिससे हज़ारों करनी बात है,
कितनी तरह की बातें है अभी बात करना बे-बात है।
ज़िंदगी बचाते भी तो कैसे हर तरफ फैला जाल है।
उसको सिर्फ़ औरों की फिक्र थी मेरा कहां ख़्याल है,
अब प्यार-मोहब्बत को देखता हूं सब भेड़-चाल है।
मां-बाप का चेहरा दिखता है ये कैसा अज़ब सा हाल है,
कोई रखता चाहत मेरे जैसा खैर अब नहीं कोई मलाल है।
By— Pradeep Yadav
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