चोट लगती थी तो अश्क बहते थे,
मां कहती थी कमजोर बयां करते है,
हस्ता था तो भी अश्क बहने लगते थे,
मां कहती थी की रोकना से

हां, मैं लड़की नही, एक लड़का हूं,
हुस्न से भरपूर नही, सरलता में गुम हूं,
दिखावे से ज्यादा मैं, मैं जैसा दिखता हूं,
मां कहती है मैं, नहीं औरों जैसा 

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