चाहत—
इस दुनियां की चाहत का अज़ीब सा हिसाब है,
यहां चाहत के जवाब में अज़ाब ही अज़ाब है।
ना-कामयाब है जो चाहत वो भी कामयाब है,
करे तो क्या करे हर तरफ शराब ही शराब है।
किसी के वफ़ा का क्या करेंगे हमें सबका बाब है,
ये दुनियां ख़राब नहीं ज़माना ही ख़राब-खराब है।
ज़िंदगी मेरी कुछ उसकी मोहब्बत की किताब है,
अब मेरी चाहत में ही महव-ए-ख़्वाब ख़्वाब है।
मेरी चाहत का ज़मीर नहीं मेहनत ही जवाब है,
अब कोई चाहत नहीं इज्तिनाब ही इज्तिनाब है।
By— Pradeep Yadav
azaab;
अज़ाबعذاب
torment/agony
पीड़ा
baab;
बाबباب
door, section, chapter
दरवाज़ा, द्वार, परिच्छेद, अध्याय
zamiir;
ज़मीर ضَمیر
Arabic ; Noun, Feminine, Noun, Masculine
pronoun
mind, heart, conscience,
conscience
अंतरात्मा की आवाज
mahv-e-KHvaab;
महव-ए-ख़्वाब محو خواب
lost in dream
निद्रामग्न
ijtinaab;
इज्तिनाब اِجْتِناب
Arabic ; Noun, Masculine
keeping away or aloof, shunning abstinence, refraining, avoidance
दूर या अलग रखना, परहेज़ करना, परहेज़ करना
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