अब थोड़ा अजनबी बन रह लूं मैं,
अब किन किन ग़ज़लों का साथ दूं,
किस्मत तू भी चल दरिया उस पार,
समंदर में उसका मिलना कमाल है।

किसी की नज़र न लग जाए दूर हूं,
कोई साथ चल दे तो उसके संग हूं,
मुझे समझ पाए जो कोई मिला नहीं,
उसके मोहब्बत में मैं अपने साथ हूं।


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