माना—

माना मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं हूं,
.मगर तुम तो मेरे लिए बहुत कुछ ना,
...माना मैं हार जाता हूं तुमसे हमेशा,
........मगर तुम तो मेरी जीत हो ना।

माना तुम्हारे तमन्नाओं ने सामिल नही,
.मगर तुम हकीकत से वाकिफ हो ना,
.......माना मेरे लकीरों में तुम नहीं हो,
..तो अब दिल में भी जगह ना दे क्या।

माना मैं तुम्हारे दर्द का हिस्सा नहीं हूं,
..मगर तुम मेरे ज़ख्मों का मर्ज हो ना,
......माना नहीं मिल रहा सुकून कहीं,
..मगर तेरी बाहों में पनाह चाहिए ना।

.माना मैं तुम्हारे हंसने की वजह नहीं हूं,
..मगर तुम तो मेरे रोने से भी रुकी नहीं,
माना मेरा तेरे दिल में बसना महंगा पड़ा,
....तो अब दिल में बसाए भी नहीं क्या।



                                By— Pradeep Yadav

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