निगाहें—

समझ में आ गया खुद की निगाहें उलझने पर,
कैसे नज़रे हटाएं उनके यूं प्यार से देखने पर।

सुकून की नींद मिलती तो हम भी होते होश में,
कैसे नज़र आए होश में भी जो है मदहोश अगर

                                      By— Pradeep Yadav


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