उम्मीदें

उम्मीदें कितनी रहती हैं जख्म से लोगों को,
यादें रिहाई देगा और दर्द सब कुछ भुला देगा।

बेवजह की कशीदगी है लोगो को ज़िंदगी से यहां,
बेशक मुश्किलों के बीच है पर खुश कौन है यहां।

मरहम के नाम पर बीमारी लिए बैठे है सारे,
क्या करें सत्तारी हुए बैठे हैं कि ज़िन्दगी खुद आएगी।


                                By— Pradeep Yadav

कशीदगी~ tension
सत्तारी~ having free time

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