नन्ही चिड़िया
उड़ती-उड़ती आई चिड़िया,
कंधे पर बैठ चू-चू-चू-चू कर प्यार जताई चिड़िया।
नन्ही रंग बिरंगी चिड़िया,
कलियों पर जा लुभाई चिड़िया।
उड़ी मेरे कंधे से जैसे ही,
आहिस्ता से मैंने पकड़ लिया।
कुछ कोमलता कुछ सादगी ने ऐसा रंग बिखेरा की,
मैं भी मस्ती में झूम गया।
देख समय की चाल अनोखी,
गुम-सुम बैठे पंछी सारे,
नहीं फैसला उनको भाया,
उड़ने में ही उनको आंनद आया।
सदा फुदकते कभी ना थकते,
सपने हजार और देते बुलंदियों की मिसाल।
By— Pradeep Yadav
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