नफ़रत
जो रहता था हर सांस में, आज है नहीं पास में।
ये शहर मुझे भाता नहीं, प्यार हो गया कि दूर जाया-जाता नहीं।
दिल अब यहां सुकून नहीं पाता, छोड़ गया किसी अपने की गली,
भरोसा टूट गया सब का, की मुस्कुराहट मेरी भी खूबसूरत हुई।
अब निगाहों-निगाहों में होते इशारों को देखना,
मैं तुम्हें याद करूंगा नहीं बस तुम मुझसे देखना।
रूह मेरी जिस्म से अलग हो गई है,
अब लौट के न आना मुझे तुमसे नफ़रत हो गई है।
By— Pradeep Yadav
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