*एक लड़का*

वो सब से अनजान था,
वो राहे सुनसान थी,
वो सफर भी गुमनाम था।

वो हार थी उसकी,
वो जीत का हकदार था,
वो अपने अंजाम से अनजान था।

वो कांधे पे ख्वाइश लिए था,
वो हर चमकती चीज की कशिश लिए था,
वो चमक के सच से नादान था।

वो अपने वक्त का भी जिम्मेदार था,
वो आज ढूंढ़ता है खुद को खुद में,
वो अपने हालत का खुद जिम्मेदार था।

वो बुराइयों में धस गया इतना,
वो इंसान भी आज लापता था,
वो अब अपने पते से बेनाम था।


                     By— Pradeep Yadav

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