फेयरवेल~
कुछ चेहरे अनजाने से,
बहुत सारे परेशान थे।
छोटी सी दुनिया में आ गए,
जहां कुछ नाम हुए आज आसमां से।
सुबह के सवेरे से,
रात की डरावनी बातों तक।
परछाई के खौफ से,
जागे सारी रात भर।
नोट्स आपस में शेयर किया,
कभी नूडल्स का स्वाद साथ लिया,...
वैसे साल तो थे बस चार,
पर उन लम्हों को ही दिल के पास किया।
वो दोस्तों की बात,
लेट नाइट एक ही लैंप के नीचे साथ,
टिफिन का वो बकवास स्वाद,
चाय की चुस्की का एहसास,
वो लम्हों की हेरा-फेरी,
अब दूरियों का एहसास।
सबके निशा है दिल में,
जो दिखा सकती नहीं,
बस महसूस कर सकती हूं,
यादों के रूप में।
बदल जाता है सब वक्त के साथ,
ये लम्हा,
ये मुलाकात,
ये जज्बात,
जैसे कोई साजिश होने को है,
जैसे मानो अब अपनों को खोने का डर है।
वो जो जाते थे कॉलेज हर रोज़,
उन रास्तों से अब जुदा हो गए।
आज अपने कॉलेज से,
हम विदा हो गए।
By— Pradeep Yadav
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