मां

कड़कती धूप, छांव का सुख,
सब बेकार की बात है...
पिता को तो सिर्फ भोज हल्का करना था,
वरना मेरे हर घंटे भूख लगने पे,
सिर्फ़ मां को खुशी होती थी।


                  By— Pradeep Yadav

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