मैं भागा~
कभी अकेले में रोया, कभी दिल खोल कर जिया।
जिंदगी के उतार-चढ़ाव में, मैंने अपनों को भी खोया।
कभी भागा डर के, कभी भाग के राहत पाया,
सपने तोड़ती गई ये दुनिया, और मैं भागने में फतेह पाया।
By— Pradeep Yadav
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