प्रेम

अब मैं क्या बात करूं इस शहर की,
जीवित प्रेम है और पता भी नहीं।
बेपरवाह हूं संभालो ना मुझे कोई,
अब प्यार नहीं शराब है हाथ में।
मुसाफिर हूं फितरत से मैं,
मुझे रास्ता ना बताएं कोई।



                By— Pradeep Yadav

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