मैं मुरीद तुम्हारा

खुशबू-ए-बदन तुम्हारा,
जुल्फों पे मैं हुआ फिदा।
तुमने जब-जब चेहरे से हटाया,
मैं हो गया मुरीद तुम्हारा।
प्यार में बेबस मै,
ना मेरा कोई ठिकाना।
मेरा इश्क खेल-सा हुआ,
मौज किया और भुला दिया।


                By— Pradeep Yadav

Comments

Popular Posts