इक सफ़र ऐसा भी😂

अब आंखों के आगे धुंधला छा रहा है,
शायद मंज़िल को कोहरा छा रहा है।

साथ छूट गया सारे साथियों का,
अब मुश्किलों ने हाथ थामा लिया है।

वो साथ देने आयी फरिश्ता बन के,
बूढ़ी लग रही है जिंदगी उसका साथ खो के।

अब मैं अकेला नहीं हूं इस सफ़र में,
मैंने कईयों को धकेला है अंधेरे में।


                        By— Pradeep Yadav

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