ये ज़िंदगी~

अभी से थक कर क्यू हार गई ये जिंदगी,
चलते-चलते क्यूं थम गई ये जिंदगी।

ना जाने कौन-सा गुनाह कर बैठे,
और हार गए अपनी ये जिंदगी।

मोहब्बत के सफर में जागे रात-भर,
अब कोई दवा दे भुलाने को वो जिंदगी।

मिठास भी फीकी है उसकी आवाज है ऐसी,
लिखना तो ठीक था उर्दू हो गई ये जिंदगी।



                           By— Pradeep Yadav

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