मयखाना
जहां तक सोचा, कल उस सोच को हटाया दिल से,
खुद को मारना पड़ा अंदर ही अंदर फिर से जगाया किसने?
देखता ही रहा मैं ताउम्र सपने उसके खुली आंखों से,
कल यूं रोया हूं मैं जैसे आया हूं किसी मयखाने से।
तोड़ दी दोस्ती शराब से एक ऐसा मंजर आया था मुझ तक,
अब मयखाने में दोस्ती इतनों से हो गई कि समंदर भी उतरता है रात तक।
By— Pradeep Yadav
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