ना मुकम्मल
तमाम ना मुकम्मल ख्वाइश अभी दिल में दबी है,
मेरा दिल रो रहा और एक आंसू भी नहीं है।
बचपन तो चला गया प्यार करते करते उसको,
वो फिक्र बहुत करती है कि शराफत अभी रहने दो।
मुझे आना था तेरे पीछे, पर हे खुदा मुझे हिम्मत दो,
मुझे अभी जीना है, खिलौना बना के ना खेलो।
तुम्हारी कहानी छुपी है, मेरा नाम बदनाम हो गया,
किस्सा सरेआम हो गया, खातिरदारी ऐसी हुई की मैं सारी बात कह गया।
By— Pradeep Yadav
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