random thoughts

यहां सब झूठे है कोई नहीं पूरा सच्चाई का है,
पूरी दुनिया खराब है तो क्या हुआ क्यूं नहीं कोई अच्छाई का है।

तजरबात से भरी दुनिया में कुछ हाथ उसका भी है,
शराब का ग्लास टूट जाए तो मिट्टी भी कहते सोना है।

उजाले और अंधेरे को कैसे खुद से जुदा कर देते है,
बता ए मेरे मालिक या तो दोनो को एक कर सकते है।

मुझसे देखी नहीं जाती ये तेज़ दुनिया और खुदा वाले इंसान,
एक शाम को सबसे मिलो और सबको फूल कर दो ना।

अच्छा खासा मैं अपनी राह पे चल रहा था,
कि उसकी झुल्फे चेहरे से टकरा गई....
मैं क्या करता ए खुदा उसकी मोहब्बत में,
उस रोज़ मोहब्बत की नई परिभाषा आ गई।

फिर से मुझे कोई कैसे छोड़ कर चला जाता,
अब तो अकेला मैं खुद के साथ हूं.....
मुझे तो और कोई काम नहीं आता....
ये मेरी मोहब्बत का तीर उसके पार क्यूं नहीं जाता।

गांव आऊं तो छुप लेना क्योंकि शाम में नज़र नहीं आता,
मैं उसके खातिर अपने होंटों पे खुशी क्यूं नहीं लाया,
मुझे याद हो तुम तुम्हें मैं चलो अब याद नहीं आता।
शायद वो खुश होगी की अब मैं उसके क़रीब नहीं जाता।।

मैं अपने राहों में भटका राहगीर हूं बस,
मुझे राहों में उजाले ने भटकाया होगा,
मेरा दरवाज़ा खुला था जब मैं उठा तो,
मैं किसी और से नहीं अपनों हरा हूंगा।










tajrabaat
तजरबात تَجْرِبات
experiences

pech-o-KHam
पेच-ओ-ख़म پیچ و خَم
Persian ; Noun, Masculine
curves, twists and turns
troubles, ups and downs, difficulty

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