कैसा~
मिट्टी की खुश्बू का एहसास ना हो जिसको,
उसने दर-ओ-दीवार को कैसे जोड़े रखा।
फूल की खुश्बू हाथ से जुदा हुई ऐसे की,
फिर जो अपना-अपना था वो साया निकला।
जिसे इंसान समझ रहा था वो इंसान कैसा,
भूल कर ले गया कोई इंसानियत उधर जैसा।
हाथ ना ही जोड़े ना ही मिलाए हुए था वो,
मगर सबने उसे खुद के मज़हब से जोड़े रखा।
देखा कई खड़े थे उसके दर पे खाने को,
मगर पत्थर कीमती जहां वहां ज़मीर कैसा।
By— Pradeep Yadav
dar-o-diivaar
दर-ओ-दीवार دَر و دِیوار
Persian ; Noun, Masculine
doors and walls, every nook and corner, all parts and corner of a dwelling
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