अकाल~

जिस्म खुरदुरी सी हुई छाला भी उग गया है,
फूलों के इस देश में कैसा ये अकाल हुआ है।

फसल से आस बची तब जा कर सवाल उठा है,
खाने में बाल पड़ा था क्या उसका मलाल हुआ है।

बदन में शरारे से जो दिखते है वो खाद उगा है,
हर मौसम में तपते हैं शरीर जैसे ढाल हुआ है।

जरा चश्मा लगा कर देखो कितना अकाल हुआ है,
ख्वाहिशात बसर करना भी अब तो मुहाल हुआ है।



                                      By— Pradeep Yadav

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