किताबें पढ़ते और कुछ सीखते रहे है,



अपने घर में ही इतने झूठ पलते रहे है,
की सपने टूटते और बिखरते रहे हैं।

खो गए यार दोस्त दिल से उतरते रहे है,
अश्क आखों से छटक कर गिरते रहे है।





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