क्या होगा?

दिल की बातों को कह देने से अच्छा क्या होगा,
कह देना अच्छा होगा तो छुपाने से क्या होगा।

किसी को बे-माल-ओ-ज़र इश्क़ हो तो क्या होगा,
दिल के ब-रोज़-ए-हश्र और 'अज़ाब का क्या होगा।

रहती है सबकी निगाहें अंधेरों में भी दीप जलाने पर,
मत उलझो मोहब्बत में जाने फिर हश्र क्या होगा।

करूं तो क्या करूं इश्क़ नहीं करूं तो क्या होगा,
यही सोचने वाले सोचो जरा उसके जाने का असर क्या होगा।

ये हर बार की पहेली है आख़िरी इसका क्या होगा,
दिल्लगी उधार रही आया तो इंतज़ार क्या होगा।

यूंही ज़िंदगी कम-कम है खुद का सोचो क्या होगा,
खाने-खाने पे ध्यान होगा तो फरेबी खुशियों से क्या होगा।



                                            By~ Pradeep Yadav


be-maal-o-zar
बे-माल-ओ-ज़र بے مال و زر
without wealth

ba-roz-e-hashr
ब-रोज़-ए-हश्र بروز حشر
on doomsday
कयामत के दिन

azaab
'अज़ाब عَذاب
Arabic ; Noun, Masculine
grave trouble, curse, torment, agony, anguish, something very vexatious and trying
divine punishment for sins, punishment, chastisement
(metaphorically) difficulty, painful or troublesome affair or event, distressing affair
गंभीर संकट, शाप, पीड़ा, पीड़ा, पीड़ा, कुछ बहुत ही कष्टप्रद और कोशिश करने वाला

hashr
हश्रحشر
doomsday, resurrection, tumult
प्रलय, हालत

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