मेरी बात मान कर देखो यार,
नज़रे उठा कर देखो यार।

निगाहें कब तक उसको ढूढेंगी,
कभी सबको भुला कर देखो यार।

खुदसे शिकायते कितनी रहती है,
आईने में मुस्कुरा के देखो यार।

लग जाए न तेरी सादगी को नज़र,
काला तिल लगा कर निकलो यार।

इस तरह से बरबाद जब तक करोगी,
निभा सको तभी करीब आओ यार।

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