क्या!!!
अपनी पहली मोहब्बत में रोया क्या,
खुद के लिए भी कभी खोया क्या।
अपनी पहली मोहब्बत में हरा था की,
दुबारा मोहब्बत में कभी आया क्या।
कभी अपनों को भी तुमने खोया क्या,
चाहने से डरा उसको हवस ने डुबाया क्या।
कभी ज़माने के शोर ने ठहराया क्या,
खुद की चीख को ज़मी में बोया पाया क्या।
पहले मोहब्बत में लिखते है कई शायर,
अब कलम अपनी मोतीयों से भिगोया क्या।
पहले तू जागा था फिर कोई सोया क्या,
तुमने अश्कों से अपना हाथ धोया क्या।
उजाले अंधेरे में खुद को कभी पाया क्या,
हार से खुद को निखारना सिखाया क्या।
"प्रदीप" के मन की आखिर ख़ुलूस क्या है,
अल्फाजों में दर्द है प्यार है तो समोया क्या।
By— Pradeep Yadav
Samoyaa;
समोया
Mixed
KHuluus;
ख़ुलूसخلوص
sincerity, truth
निष्कपटता, निश्छलता, सिक़- दिली, सत्यता, सच्चाई, गाद, तलछट
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