कलम का सिपाही~
नज़्म, ग़ज़ल, काफिला, शायरी और क्या क्या है वहां,
मैं आ तो जाऊंगा मगर क्या इदराक है मेरे लिए वहां।
खुद को नाहक़ ही निढाल और पाएमाल किया मैंने,
आदमी गुनाह से परहेज करेगा तो गुनाह होगा कैसे।
चुस्त होऊं या ना होऊं मैं सुस्त बे-कमाल का हूं जबान,
उठाई ये तकलीफ कहने में की मैं इंसान हूं कमाल का।
मैं खोज रहा खुद को घर में कोई आवाज नही होती,
खोज मुझे मेरे साए से मेरी खोज छाए में नहीं होती।
हिंदी, अरबी, फारसी और अल्फाज़ जो उर्दू में कहें मैने,
कहती हुस्न-ए-मल्लिका तो लाज़मी होता गिरना-डूबना।
इससे अच्छा तुमने पढ़ लिया होता किसी शायराना की शायरी कोई,
क्योंकि 'प्रदीप' के पास हुस्न नही केवल कलम है स्याही से भरी हुई।
By~ Pradeep Yadav
idraak;
इदराक ادراک
perception, understanding
अगोचर वस्तुओं का अनुभव, गैर- महसूस चीज़ों को दर्याफ्त, ज्ञान, बोध, समझ-बूझ ।
paa.emaal
पाएमाल پائمال
ruined, devastated subdued, trampled under foot trodden
naahaq
नाहक़ ناحَق
unjust, false
unjust, improper, wrong, improperly in vain
निढाल نِڈھال
helpless, defeated, lackadaisical, languid, weary, worn out, too weary to move
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