इक तरफा बात नही बनती है~

इक चेहरा था जिसके हम हो कर ना हो सके है,
इक हार थी जिसको कभी कबूल ना कर सके है।

कई बादलों के मिलने से ही बात बनती है,
और इसके बाद बरसात की बात बनती है।

जो भीग के बीमार पड़ा उसपे क्या गुजरी होती है,
खुद तकलीफ के सिवा किसको ख़बर होती है।

मेरी कलम फ़क़त मनाज़िर उसको बयां कर देती है,
इसके अलावा चारा क्या है जो हाल है बयां कर देती है ।

हुस्न किसी का तसव्वुर ही खूबसूरत होता है,
और फिर देखने वाले नज़र का कसूर होता है।

मिस्मार ही नही हमे तीरगी से खौफ़ज़दा है,
यहां जाती के ढांचे में खेल सारा जात का है।


                                     By~ Pradeep Yadav

मिस्मार ;
mismaar مسمار
demolished, razed, ruined
तबाह

तसव्वुर;
tasavvur تصور
imagination, contemplation, reflection, conception

tiirgii;
तीरगी تیرگی
darkness, gloom
अँधेरा

KHaufzada;
खौफ़ज़दा خوفزد
scared, fearful

faqat;
फ़क़त فَقَط
merely, simply, only, end


मनाज़िर;
manaazir مَناظِر
चीज़ें जो नज़र आएं, नज़ारे, तमाशे

Comments

Popular Posts