आज़ाद हो के कैद है~
शरीर में कोई तो तड़प या दर्द से पीड़ा होगी,
ज़िंदगी नंगे पाँव दौड़ के भूक तो लगी होगी।
तख़्त-ए-शाही को पहलू में दबाए रखा होगा,
उसे भी हुकुम चला के रिहा जो करना होगा।
मेहनत से मिल गया जो फूल उसने कमाया होगा,
जम्हूरियत में गुलाम बेवजह ही मारा गया होगा।
राज़ को मंज़र-ए-'आम निस्बत से अलग किया होगा,
सबूती तौर पे पिंजरे में फूलों का गुलदस्ता रखा होगा।
जरा सी आंच होगी और तो दिल में भी धुआं होगा,
कभी आज़ाद क्या दिल का मेरे ये हिंदुस्तान होगा।
By~ Pradeep Yadav
भूक;
bhuuk بُھوک
संस्कृत ; संज्ञा, स्त्रीलिंग
पेट खाली होने पर अन्न आदि भक्षण करने की तीव्र इच्छा।
jamhuuriyat;
जम्हूरियत جمہوریت
democracy
गणतंत्र, जनतंत्र, प्रजातंत्र।
तख़्त-ए-शाही;
throne, bed
बादशाह या राजा के बैठने की चौकी, राज्य, राष्ट्र, हुकूमत करने वाले की जगह।
pahluu;
पहलू پہلو
side/ flank/ point of view
phuul;
फूल پُھول
Sanskrit ; Noun, Masculine
(in Hindus) the charred bones of a dead body
(in Muslims) the ceremony on the third day after death
निस्बत;
nisbat نِسبَت
लगाव; संबंध; ताल्लुक
सम्बन्ध, तअल्लुक़, लगाव, संपर्क।
मंज़र-ए-'आम;
manzar-e-'aam مَنظَرِ عام
खुली जगह, जहाँ सब लोग आ-जा सकें, सार्वजनिक स्थान, खुला दृश्य।
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