नज़रे मिलाई नहीं जाती~
बुराई से लड़ते-लड़ते बुराई किस में नहीं है आ जाती।
जरा-सी चोट लगने पर ज़ख्म दिखाने लगते है लोग,
मैं लिख देता हूं कुछ तो शोर मचाने लगते है ये लोग।
दिल के मरीज़ छुप-छुप के सवाल बहुत उठाया करते हैं,
हुस्न से खेलते है फिर क्यों सर-ए-दार हो जाया करते है।
गांव का गुड गराँ लगा और शहद ज़ेहन लगा सबको,
मय-ख़्वार के शौक़ीन थे तो आरज़ान शराब के हुए क्यूं।
By~ Pradeep Yadav
sar-e-daar;
सर-ए-दार سَرِ دار
Persian ; Adjective
about to be hanged, on the crucifix, at the gallows, at the tomb
garaa.n;
गराँ گراں
unpleasant/ dear, costly
mai-KHvaar;
मय-ख़्वार مَے خوار
Persian ; Adjective
wine drinker
zehn;
ज़ेहनذہن
mind/ मन, दिमाग
aarzan;
आरज़ान
Cheap/ सस्ता
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