हम उम्र~

इक हम उम्र की मुश्किलें भला क्या-क्या हो सकती है,
सब यही बोलते है बच्चों को दिक्कतें क्या हो सकती है।

हम उम्र के साथी अब मेरे यहीं है और क्या मुश्किलें हो सकती है,
ये जो अनसुलझी-सी राहें है बस यही राहें मेरी मजिल की पहेली है।


                                       By~ Pradeep Yadav

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